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हिन्दू वैयक्तिक विधि==========

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परिचय ------------------- प्राचीन भारत में धर्म को इसोपासना से अधिक विधि का विषय माना जाता था आप किसी भी सम्प्रदाय के अनुयायी हो किन्तु आप पर एक समान विधि लागू होती थी । महर्षि याज्ञवल्क्य ने धर्म (विधि) के चार स्रोत बताये हैं । श्रुतिः स्मृतिः सदाचारः स्वस्य च प्रियात्मन: । सम्यक्संकल्पज: कामो धर्ममूलमिदं स्मृतं ।। अर्थात श्रुति स्मृति सदाचार तथा प्रथाएं ( सम्यक संकल्प द्वारा उत्पन्न इच्छाएं) । आगे याज्ञवल्क्य ने पुनः ज्ञान के चौदह स्तम्भ बताये हैं - पुराण-न्याय-मीमांसा धर्मशास्त्रांग मिश्रितः । वेदः स्थानानि विद्यानां धर्मस्य च चतुर्दशः ।। अर्थात चार वेद , छः वेदांग , धर्मशास्त्र , न्याय , पुराण और मीमांसा । मैंने यहां पर इसलिए याज्ञवल्क्य स्मृति से ही उदाहरण देना इसलिए उचित समझा क्योंकि भारत में हिन्दू विधि पर मनुस्मृति की अपेक्षा याज्ञवल्क्य स्मृति का ही प्रभाव ज्यादा है या यूं कहें उसी से भारत में हिन्दू विधि संचालित होती है । भारत में हिन्दू विधि पर प्रथाओं (देशाचार , लोकाचार और कुलाचार) का अत्यधिक प्रभाव होने के कारण हिन्दू विधि को कई शाखाओं में बां...

सोशल मीडिया कितना सोशल ========

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तिथि थी 22 जुलाई 2017 की मैं राज्यसभा टीवी पर एक डिबेट देख रहा था विषय था "सोशल मीडिया कितनी सोशल" प्रथम दृष्टया ये विषय मुझे ऐसा ही लगा कि जैसे कोई पूछे कि "दर्द निवारक औषधि कितनी लाभकारी" । सबसे पहली बात यह होती है कि आखिर उस औषधि अथवा मीडिया का प्रयोगकर्ता कैसा है ? क्योंकि माध्यम का अपना कोई आशय , दुराशय या जिसे लैटिन भाषा में कहते हैं mens rea नही होती है जैसे हम आतंकियों द्वारा गोली चलाने के लिए Ak-47 को दोषी नहीं बता सकते वैसे ही यहां भी परिस्थिति आती है । कई लोग अलग अलग बातें बता रहे थे कोई इसे जंगल बता रहा था तो कोई रेगुलेट करने की बातें कर रहा था जैसे तमाम सकारात्मक और नकारात्मक बातें सामने आ रही थीं । सर्वप्रथम हमें जानना चाहिए  कि सोशल मीडिया महज एक माध्यम है जो कि सामाजिक मेल मिलाप , बातचीत तथा सूचना भेजने और प्राप्त करने की गति तीव्र कर देता है और दूरियां घटाता है । यहां पर होने वाली घटनाएं यथा सत्य-असत्य, सम्मान-अपमान, गालियां-दुलार आदि से उसका कोई लेना देना नहीं है  उसका लेना देना समाज के लोगों तथा उनकी सोच से है । जब सोशल मीडिया पर राजनीतिक अ...

रामोsहं - प्रयास राम बनने का

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जबसे राम को थोड़ा बहुत जाना या सुना है हमेशा से राम में एकाकार होने का सपना रहा है । जब मैं इन राम की बात करता हूँ तो यहां पर राम शब्द का कोई दार्शनिक या अन्य अर्थ नहीं है बल्कि मैं बात करता हूँ तुलसी के उन्ही राम की जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम थे और अयोध्या के इच्छवाकु वंशी महाराजा दशरथ के पुत्र और महाराज आज के पौत्र थे । उन्होंने नररूप धारण करके बताया कि सत्य, धर्म और विशुद्ध मानवीय मूल्यो के साथ जीवन का निर्वाह बिल्कुल प्रायोगिक होकर किया जा सकता है जिसमें प्राणी मात्र के कल्याण का उद्देश्य निहित हो । एक बेहतरीन पुत्र, भाई, पति , योद्धा और मनुष्य बनकर । किन्तु विडम्बना यह है कि मैं प्रयास करता हूँ  दशरथ पुत्र राम के रूप में जीने का परन्तु प्रत्येक प्रयास के बावजूद मन मे असंतोष किन्ही कारणों से उत्पन्न हो जाता है जिसकी परिणति क्रोध के रूप में हो जाती है ।बार - बार सोचता हूँ आखिर इसका कारण क्या है ? फिर एक तर्क अपनी इस नाकामी को छिपाने के लिये मन गढ़ लेता है "राम जैसा पुत्र बनने के लिए आवश्यक है कि दशरथ जैसा पिता भी हो ।" किन्तु हर बार इस तर्क को मन में उतारने में असफल र...

यदि ऐसा हुआ तो ?

18 सितम्बर 2016 उगता हुआ सूर्य एक त्रासदी लेकर आया हमारे देश के 17 सैनिक पाक समर्थित लश्कर के हमले में शहीद हो गए जो की देश के लिए अत्यंत दुःखद घटना रही सम्पूर्ण देश दुःख के समंदर में डूब गया । हर तरफ सरकर पर एक प्रभावी कार्यवाही और युद्ध करने के लिए दबाव बनने लगा । वास्तव में हर व्यक्ति बदला चाहता था पाकिस्तान से उन अपने प्रिय 17 जवानों के जिनके जाने देश के 17 परिवार सूने हो गए । आम इंसान तो न राजनीती जानता है और न कूटनीति उसे तो बस यही समझ आता है साहब मेरे हृदय में रहने वालों का बुरा करने वालो को सज़ा मिलनी चाहिए और वो उसी के लिए सरकारों पर दबाव बनाता है । अगर हम देखें तो पाते है इन समस्या के समाधान के तीन तरीके दिखते है - 1- *शांतिपूर्ण तरीके से समाधान* 2- *युद्ध द्वारा समाधान*  3- *संघर्ष द्वारा समाधान*  * शांतिपूर्ण तरीको से समाधान* इसको हम पुनः तीन हिस्सों में बांटकर समझ सकते है - * शांति की पहल द्वारा* जिसके अंतर्गत वार्ता , मध्यस्थता, जाँच, समझौता, विवाचन,न्यायिककार्यवाही, संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयास । परन्तु वास्तव में ये हम 1947 से आजमाते चले आ रहे है पर ...